रावण की नज़रों से जानिये, क्या हैं स्त्रियों के अवगुण

रावण का नाम लेते ही दिमाग में कैसी छवि आती है ? हममें से अधिकांश लोगों के मन में एक नकारात्मक व्यक्ति की ही छवि आती है | अब अगर कोई किसी दूसरे की पत्नी का हरण कर उसे बंदी बना कर रखेगा तो खलनायक तो कहलाएगा ही | पूरा संसार रावण को बुरा कहता है, पर उसके ज्ञान की और उसके गुणों की चर्चा कोई नहीं करता | अगर किसी में कुछ अच्छाई है तो उसे दुनिया के सामने पेश तो करना ही चाहिए ना, इसीलिए हमारा ये लेख आपको उसके कुछ महान गुणों से अवगत कराएगा |

वास्तव में शिव स्त्रोत का यह रचियता महापंडित होने के साथ-साथ महाज्ञानी भी था | भविष्यदृष्टा होने के कारण वह जानता था कि नारायण का अवतार श्री राम ही उसका उद्धार कर सकते हैं | इसीलिए यह सारे क्रियाकलाप उसने अपनी मोक्ष-प्राप्ति की इच्छा से ही किये थे | अपने हर कर्तव्य को पूर्ण निष्ठा के साथ निभाने वाला रावण बहुत बड़ा तपस्वी था जो अपने आराध्य भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कुछ भी कर सकता था | जहाँ तक बात है माता सीता का हरण करने की तो उसने पराई स्त्री का हरण अवश्य किया था, परन्तु यह उसने अपनी बहन शुपर्णखां के उकसाने पर किया था | लेकिन यह बात नज़रंदाज़ करने लायक नहीं है कि उसकी मंशाएं गलत नहीं थीं, वह प्रेम सिर्फ अपनी एकमात्र पत्नी मंदोदरी से ही करता था |

लंकापति रावण ने अपनी बहन शुपर्णखां के अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए माता सीता को हरण कर उन्हें लंका में रखा और इसी कारण श्रीराम ने लंकेश को युद्ध के लिए ललकारा | पतिव्रता मंदोदरी इस खबर से डर गई और अनिष्ट की आशंका से आशंकित हो अपने स्वामी से विनती करने लगी कि सीता को भगवान राम को वापस लौटा दें | कृपया उनसे क्षमा मांग कर युद्ध को टाल दें |

ऐसी बात अपनी पत्नी के मुंह से सुन रावण ने एक बात कही जो आज भी रामचरितमानस में दर्ज है | दशानन बोला “नारि सुभाऊ सत्य सब कहहीं | अवगुण आठ सदा उर रहहीं | साहस अनृत चपलता माया | भय अबिबेक असौच अदाया |” रावण के अपनी अर्धांगिनी से कहे हुए इन शब्दों से हमें स्त्रियों के आठ अवगुणों की जानकारी मिलती है | महाज्ञानी रावण ने जो आठ गुण वर्णित किये हैं, वे कुछ इस प्रकार हैं :-

  • अत्यधिक साहस – रामचरित मानस के अनुसार महिलाओं का पहला अवगुण है अत्यधिक साहस होना | हालांकि, साहसी होना कोई बुरी बात नहीं है परन्तु साहस को कहाँ और कैसे प्रयोग करना है, यह स्त्रियों को ज्ञात नहीं होता | अपनी इच्छा से कुछ भी विरुद्ध दिखे या अपने मन-मुताबिक चीज़ें ना मिले तो वे अत्यधिक साहस के साथ आगे बढ़ती हैं और ये भूल जाती हैं कि वे अपने साहस का गलत जगह प्रयोग कर रही हैं |
  • असत्य का सहारा – स्वर्णपुरी के राजा ने स्त्रियों का दूसरा अवगुण ये बताया है कि वे अपने जीवनकाल में लगातार झूठ बोलती हैं | वे अपनी बातों को छिपाने के लिए कदम-कदम पर असत्य का सहारा लेती हैं | रामायण में भी यह बात दर्ज है कि मंदोदरी ने तक बहुत झूठ बोले थे | पर सच भला कब छिपा है, इसीलिए झूठ बोलकर जब वे फंसती हैं या अपने पति और परिवारजनों को परेशानी में डालती हैं तो पछताना भी पड़ता है |
  • चंचलता – स्त्रियों का तीसरा अवगुण है चंचलता जो उनके मन को अस्थिर बनाता है | इसके कारण उनका मन एक जगह पर अधिक समय के लिए नहीं टिकता और वे स्वयं के लिए दुविधाएं खड़ी कर लेती हैं | रावण के अनुसार पत्नियाँ अपने पति से अधिक चंचल होती हैं |
  • माया रचना – अब बात करते हैं चौथे अवगुण की जोकि है माया रचने की कला| अपनी इसी कला के परिणामस्वरूप स्त्रियाँ कहीं ना कहीं परिस्थितियों को अपने वश में कर लेती हैं एवं अपने मन का काम करवा लेती हैं | चाहे इसके लिए उन्हें नखरे दिखाने पड़ें, रूठना पड़े, प्रलोभन देना पड़े या नाटक करके सामने वाले को मनाना पड़े पर वे अपना काम सिद्ध करवाएंगी ही | उनके माया रचने का अवगुण उन्हें स्वार्थी बनाता है, जिससे वे दुनिया को भूल अपने स्वार्थ की पूर्ती में लगी रहती हैं |
  • डरपोंक – जल्दी डर जाना, परिवर्तित होती हुई परिस्थितियों को देखकर घबरा जाना, यह है महिलाओं का पांचवां अवगुण है यानी उनका डरपोंक होना | मंदोदरी ने भी भगवान राम की महिमा जानकर अपनी इस प्रवृत्ति के कारण लंकेश को युद्ध करने से रोका | उसे अपने स्वामी की मौत का भय सता रहा था जिससे उसके लिए यह ज़रूरी नहीं था कि उसका पति अपना बल दिखाए बल्कि वह उसे डरा के घर बैठाना चाहती थी | रावण की राय में स्त्रियाँ भले ही कितना भी साहस क्यों ना दिखाएं लेकिन उनके मन में व्याप्त भय उनके सोचने-समझने की शक्ति समाप्त कर देता है |
  • मूर्खता – रामचरितमानस के वर्णन के अनुसार स्त्रियाँ भले ही बुद्धिमता से परिपूर्ण होती हैं और उनका दिमाग भी गतिशील होता है परन्तु अविवेक जैसा अवगुण उनकी बुद्धि भ्रष्ट कर देता है | इससे उनके लिए हुए निर्णय उन्हें मूर्ख सिद्ध करवा देते हैं जिससे अकसर बड़ी-बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं |
  • निर्दयता – इस अवगुण को सुनकर आपको अवश्य आश्चर्य हो रहा होगा क्योंकि महिलाएं अपनी दयालु प्रवृत्ति के लिए जानी जाती हैं | लेकिन लंकापति कहते हैं कि जिस पर दया ना आए उसपर वे कभी दया नहीं करती, ये उनकी जिद की तरह होती है |
  • अपवित्रता – यह पढ़ कर बुरा लगना लाज़मी है किंतु हम क्षमा मांगते हैं परन्तु रामचरितमानस में यह बात वर्णित है कि रावण ने आठवां अवगुण स्वच्छता का अभाव बताया है | ना जाने किस कारण रावण ने स्त्रियों को अपवित्र बताया है |     

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