और भगवान श्री कृष्ण ने फिर एक विदुर के घर भोजन ग्रहण किया !

भगवान श्रीकृष्ण, पांडवो की और से सन्धिदूत बनकर कौरवो के पास गए, परन्तु उन्होंने उनके प्रस्ताव को स्वीकारने से इंकार कर दिया ।इसकेउपरांत कौरवों ने उनसे भोजन के लिए आग्रह किया, परन्तु श्री कृष्णा उसे अस्वीकार करते हुए विदुर जी की कुटियां पहुंचे ।उन्हें आया देखविदुर की पत्नी सुलभा ने उन्हें घर मे बना साधारण भोजन  परोस दिया ।भगवान ने प्रेमपूर्वक उसे ग्रहण किया । विदुर ने पूछा हे कृष्ण भगवनआपसे कौरवो ने अन्न ग्रहण करने क लिए क्या नहीं पूछा ?” भगवान श्रीकृष्ण से बोले – “विदुर! मैं भला अनीति पर चलने वालों का अन्न कैसेग्रहण कर सकता हूँ ? मुझे जो स्वाद और संतोष आपके इस साथद्विक वातावरण मे भोजन ग्रहण करके मिला हैं , वह अहंकार मे लिप्त कौरवोंके राजसी भोजन मे कहाँ ?”

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