सूतक लगना क्या है, गरुड़ पुराण में भी इसकी चर्चा


1. क्या है सूतक ?
किसी बच्चें के जन्म और आदमी के मरने से पहले कई प्रकार के रीति-रिवाजों से गुजरता है उनमें से एक सूतक है । सूतक एक पंरपरा की तरह है जिसमें मरने के बाद और जन्म से पहले परिवार में सूतक लग जाता है जिसके चलते परिवार को सूतक का सामना करना पड़ता है । कई लोगों को मानना है कि यह एक “वैज्ञानिक प्रकिया” है तो कुछ का कहना है कि यह एक “अंधविश्वासी पंरपरा है” । लेकिन आज तक इस सवाल से पर्दा नहीं उठा है कि क्या सच में इसके पीछे कोई वैज्ञानिक सोच है भी ?

2. जीवन के बदलते रास्ते
एक बच्चें के जन्म से लेकर मृत्यु तक कई पहरों से गुजरता है । कुछ पहरों में खुद को खुशनसीब मानते है कभी खुद को कोसने लगते है । अगर, हम धर्मों की बात करें तो हर धर्म ने इंसान के जीवन को पंरपरा और प्रतिष्ठा जैसी चीजों से जोड़ कर रखा है जिससे इंसान की जिंदगी में कठिन पड़ावों को सहन करने की क्षमता और महत्व बढ़ जाता है ।
3. क्यों बोझिल बन रहा है जीवन ?
आपने सुना होगा कि “जिंदगी” एक पहेली है “ जो आया है उसे जाना ही होगा लेकिन इस बीच का सफर भी काटना होगा “ कईयों का सफर अंत से पहले ही खत्म हो जाता है । हमेशा आपके आस-पास ऐसे लोग होते है जो परेशान रहते है रोते रहते है, क्यों ? इस सवाल का उत्तर आपको और मुझको आज तक नहीं मिला, फिर भी हम खुश रहने की चाहत तो रखते है , इसलिए बंजारों की तरह गम से दुरी बनाने की भी जहदोजहद करते है । कुछ लोग गम के अंधेरें में खुद के जीवन को बोझिल बना लेते है फिर सोचने में आधा दिन, हफ्ता और महिना गुजार देते है ऐसे ही साल कब गुजर जाता है पता भी नहीं लगता है ।
4. क्यों जन्म के बाद सूतक ?
मेरी मां बताती है कि जब मेरा जन्म हुआ था तब पूरे परिवार में 10 दिन के लिए सूतक लग गया था । पूरे परिवार में किसी ने भी धार्मिक कायों में भाग नहीं लिया था और ना ही कोई मदिंर तक गया । माना जाता है कि इन 10 दिनों में न तो कोई पूजा होती है ना ही कोई पाठ । इसके अलावा मेरी मां को 10 दिन की छुट्टी मिल जाती है क्योंकि ना तो उन्हें रसोईघर में घुसना पड़ता था ना ही कोई घर का कोई काम । बता दें ,ये छुट्टियां हवन तक की मिलती है क्योंकि ऐसा मानना है कि हवन के होते ही घर का पर्यावरण स्वच्छ हो जाता है और बुरी ताकतें भी दुर हो जाती है ।

5. अंधविश्वास या व्यवहारिक ?
जैसा कि आपने उपर पढ़ा है कि सूतक को अंधविश्वास भी माना जाता है लेकिन अक्सर लोग इसका व्यवहारिक पक्ष समझना भूल जाते है बस अपनी मस्ती में आलोचना करना शुरु कर देते है । तो आइए कारण बताते है कि सूतक किस बला का नाम है , तो जैसे ही महिला बच्चें को जन्म देती है उस वक्त से आने वाले 10 दिन तक उसका शरीर काफी उतार-चढ़ाव से गुजरता है उसमें शारीरिक कमजोरी, दर्द और थकान भी शामिल है , साथ ही आज भी ज्यादातर परिवार संयुक्त परिवार में रहते है तो ऐसे परिवारों आराम मिलना मुश्किल हो जाता है जिसके लिए उसे आराम करने जरुरत महसूस होती है । यही नहीं महिलाओ का सिन्दूर लगाना भी बहुत फायदेमंद बतया गया है , सिन्दूर अगर सही  तरह से लगाया जाये तो  पति की उम्र भी लम्भी होती है  यहां पर सूतक भगवान बनकर मां की मदद करने आता है ।

7. विभिन्न समयावधि क्यों ?
दिलचस्प बात ये है कि विभिन्न वर्णों के लिए विभिन्न सूतक हॉलीडे होते हैं । जैसे कि ब्राह्मण महिला के लिए 10 दिन की छुट्टी होती है तो वैश्य महिला के लिए 20 दिन,क्षत्रिय के लिए 15 दिन और शूद्र महिला को 30 दिन के लिए रसोईघर से अवकाश मिल जाता है ।
8.क्यों 30 दिन की शूद्र महिलाएं की छुट्टी ?
किताबों में लिखा है कि मध्यकालीन युग में शूद्र वर्ण की महिलाओं को परिवार की जिम्मेदारी ज्यादा दी जाती थी उनका परिश्रम अन्य वर्णों की महिलाओं के परिश्रम से कहीं ज्यादा होता था । इसके पीछे के कारण इस प्रकार है कि शूद्र महिलाओं को उच्च वर्ण के परिवारों में जाकर सफाई, बर्तन आदि काम करने पड़ते थे और बच्चें के बाद फिर से पूराने रंग में डलने के लिए वक्त लगता है । इसी कारण के चलते शूद्र महिलाओं की छुट्टी 30 दिन की रखी गई थी ।

9. संक्रमण का खतरा
बच्चा पैदा होने के बाद महिला के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है । साथ ही, अन्य रोगों के संक्रमण के दायरे में आने के मौके बढ़ जाते है । इसलिए 10-30 दिनों के लिए महिला को बाहरी लोगों से दूरी बना कर रखा जाता है । लेकिन बदलते समय में चंद लोगों ने सूतक को एक अंध विश्वासी प्रथा का मसला बना दिया है जोकि खुद महिलाओं के लिए सुरक्षा बाण है और बच्चें की जिंदगी के लिए जरुरी भी है ।
10. बच्चे का शरीर
बदलते वक्त में प्रथाएं भी बदली है लेकिन कुछ प्रथाओं को बदलना मतलब विदेशों की बीमारियों को अपने देश में न्यौता देने बराबर है । ऐसी प्रथाओं में से एक है सूतक ।
आपने भी ध्यान दिया होगा कि जैसे ही बच्चा संसार के वातावरण में आता है तो कुछ बच्चों को बीमारियां जकड़ लेती है शारीरिक कमजोरियां बढ़ने लगती है और कभी कभी बच्चों को डॉक्टर इंक्यूबेटर पर रखते है जिससे वो बाहरी प्रदुषित वातावरण से बचाया जा सके ।
11. मृत्यु के पश्चात सूतक
बच्चे के जन्म लेते ही परिवार के सदस्यों पर सूतक लग जाता है वैसे ही मृत्यु के बाद परिवार के सदस्यों को पर “पातक” लग जाता है । इस प्रकिया में परिवार का कोई भी सदस्य पूजा प्रार्थना नहीं कर सकता है ना ही धार्मिक स्थल पर दर्शन करने जा सकता है साथ ही धार्मिक कार्यों से दूरी बनानी पड़ती है ।
12. गरुड़ पुराणके फायदें (garuda purana)

शास्त्रों में गरुड़ पुराण के मुताबिक, जब परिवार में किसी का देहांत होता है तो परिवार को पातक का सामना करना पड़ता है । इस प्रक्रिया में पुजारी को घर बुलाकर गरुड़ पुराण का पाठ कराया जाता है जिससे परिवार में शांति बनी रहे। गरुड़ पुराण में माना जाता है कि अगर परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो पातक के नियमों को जानना जरुरी है ।
13. क्या है पातक
परिवार सदस्य की मृत्यु के 13वें दिन पातक क्रिया की जाती है उस दिन परिवार के अन्य सदस्यों ब्राह्मणों को भोजन करवाते है । क्योंकि ब्राह्मणों को देवता स्वरुप माना जाता है । इन सब प्रक्रिया के बाद मृत सदस्य के कपड़ों को गरीबों में बांट दिया जाता है और पुरानी चीजों को असहाय व्यक्तियों में दे दिया जाता है ।
14. स्नान का महत्व पर चर्चा
आज की युवा पीढ़ी अंतिम संस्कार के बाद नहाने से कतराती है क्योंकि ये सब उनको उबाऊ, अंधविश्वासी और कट्टरवादी सोच की निशानी लगती है लेकिन ठहर जाइए और इसके पीछे के वैज्ञानिक तर्क को भी समझने की कोशिश जरुर करनी चाहिए, सदस्य की मृत्यु के पीछे कई कारण हो सकते है जैसे कोई लंबी सांस की बीमारी या शुगर की समस्या या फिर किसी एक्सिडेंट के चलते मृत्यु हो जाना । कारणों की फेहरिस्त कम नहीं है लेकिन मसला ये है कि ये सारे कारण आपके शरीर में संक्रमण के जरिए आ सकते है और आपको भी रोगी बना सकते है । कभी कभी देखा गया है कि कोई आदमी दाह संस्कार के बाद बीमार पड़ जाता है क्योंकि वहां के कीटाणू उसके घर तक रास्ता बना लेते है इसलिए हमेशा बड़े-बूढ़े , बच्चों को दाह संस्कार के बाद स्नान करने की हिदायत देते है ताकि श्मशान घाट के कीटाणु घर के भीतर आपके कमरे तक ना पहुंचे । इसलिए घर के बाहर नहाने को जरुरत माना जाता है ।
15. हवन की खूबियां
कभी कभी जब परिवार में सारी प्रक्रियाओं का अनुसरण होने पर भी संक्रमण की संभावनाएं बरकरार रहती है इसलिए अंतिम शस्त्र के रुप में हवन किया जाता है और इसलिए भी परिवार के सदस्यों को सार्वजनिक स्थलों से दूर रहने को बोला जाता है । हवन होने के बाद घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है और पातक प्रक्रिया की मीयाद भी पूरी हो जाती है ।

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