अश्वत्थामा का जीवित होना- सच या रहस्य!

महाभारत के पात्र ‘अश्वत्थामा’ से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं I बचपन से हिन्दू सनातन धर्म की कथाएँ हमें उसके बारे में बताती आ रही हैं, जिनमें उसके अभी तक जिंदा होने का ज़िक्र भी मिलता है I यह बात आज भी एक रहस्मयी सवाल बनकर खड़ी हुई है कि क्या वाकई अश्वत्थामा इस युग में भी जीवित है I इस बात से भ्रमित ना हो जाइएगा कि अपनी महानता के कारण अश्वत्थामा अमर हो गया होगा, क्योंकि सत्य तो यह है कि अश्वत्थामा अमरत्व की जगह भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए श्राप को झेल रहा है I

अश्वत्थामा
Ashwathama

जिन भाइयों और बहनों को अश्वत्थामा के बारे में कोई जानकारी नहीं है, उनके लिए अश्वत्थामा का एक छोटा सा परिचय हम आपको अवश्य देंगे I शरद्वान की पुत्री कृपा के गर्भ से उत्पन्न थे अश्वत्थामा जो गुरु द्रोणाचार्य के वीर पुत्र थे I इन्हें रूद्र के ग्यारह अवतारों में से एक के रूप में भी जाना जाता है I ऐसी भी मान्यता है कि जन्म के समय अश्वत्थामा के कंठ से हिन-हिनाने का स्वर निकला रहा था जिस कारण उन्हें यह नाम मिला I महाभारत युद्ध के अंतिम दिन अश्वत्थामा को कौरव-दल का सेनापति नियुक्त किया गया था I एक बार मध्यरात्रि में पांडवों, एवं अपने पिता के हत्यारे धृष्टद्युम्न और शिखंडी को मारने के उद्देश्य से अस्वत्थामा ने कृपाचार्य और कृतवर्मा जैसे योद्धाओं के साथ पांडव-शिविर में प्रवेश किया I परन्तु रात्रि के अंधेरे में उसने धोखे से पांडवों के बजाय पांचो द्रौपदी-पुत्रों की हत्या कर दी I

दरअसल, धृष्टद्युम्न ने युद्ध के दौरान छल से गुरु द्रोणाचार्य की हत्या कर दी थी I इसीलिए अश्वत्थामा दुर्योधन से आज्ञा ले चुका था कि युद्ध के अंतिम चरण में वह धृष्टद्युम्न और पांडवो को मार डालेगा I किंतु जब पांडवों के बजाय उनके पुत्रों का अंत हुआ तो पांडव-सेना में हाहाकार मच गया I क्रोध से भरे हुए पांडव अपने पुत्रों की मृत्यु का बदला लेने के लिए अश्वत्थामा के पीछे भागे और पांडवों ने उसकी कीमती मणि भी छीन ली, जो उसे देवता, दानव और नागाओं से रक्षा प्रदान करती थी I इसके साथ ही मणि के कारण अश्वत्थामा को भूख, हथियार और रोगों का भय भी नहीं सता सकता था I

मणि लेने के उपरांत अर्जुन ने उसे युद्ध के लिए बुलाया I अश्वत्थाम भी राज़ी हो गया और युद्ध प्रारंभ होते ही जैसे-ही उसने ब्रह्मास्त्र का आवाहन किया तो अर्जुन ने भी पशुपतस्त्र को पुकारा I ऋषि-मुनियों और ज्ञाताओं को भय था कि इन दोनों शस्त्रों ही से दुनिया की समाप्ति निश्चित है, इसीलिए उन्होंने शस्त्रों को वापस लेने की विनती की I विश्व-कल्याण के बारे में विचार कर अर्जुन ने तो अपना शस्त्र वापस ले लिया परन्तु अश्वत्थामा के लिए ब्रह्मास्त्र को वापस लेना संभव नहीं था I

गुस्से में अश्वत्थामा ने अर्जुन की पुत्र-वधु के गर्भ पर ही बाण चला दिया I उस समय अभिमन्यु की अर्धांग्नी उत्तरा ने परीक्षित को अपने गर्भ में धारण कर रखा था, परन्तु ब्रह्मास्त्र के कारण पांडवों का भावी उत्तराधिकारी (वारिस) गर्भ में ही मृत्यु को प्राप्त हो गया I तब भगवान गिरधर-गोपाल ने अभिमन्यु-पुत्र परीक्षित को अपनी शक्तियों से पुनः जीवित किया लेकिन क्रोध में आने पर श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को 3000 वर्ष के लिए कुष्ठरोग का अत्यधिक भीषण श्राप भी दिया I अश्वत्थामा का पूरा शरीर रक्त और पस बहने वाले घावों से भर गया I कभी ना ठीक होने वाले इस श्राप से अश्वत्थामा की मुक्ति संभव नहीं थी I

कहते हैं लोग अमरता का वरदान प्राप्त करते हैं परन्तु एक दूसरे विवरण का उल्लेख करें तो अश्वत्थामा को अमरता का वरदान नहीं अपितु अमरता का अभिशाप प्राप्त है I ऐसा माना जाता है कि कलियुग के अंत तक जीवित रहने के अभिशाप के कारण अभी भी अश्वत्थामा अरब प्रायद्वीप में रहता है I इन सारी बातों पर यदि विश्वास किया जाए तो ऐसा कहा जा सकता है कि द्रोणाचार्य का वीर पुत्र अभी भी जीवित हो सकता है, जिसके सबूत कलियुग में भी अकसर मिलते आए हैं I आगे हम आपको कुछ ऐसी ही घटनाएँ बताएंगे जो कलियुग में भी अश्वत्थामा के जीवन की पुष्टि करती हैं I

पहली घटना है मध्यप्रदेश की जहाँ एक डॉक्टर ने अस्वत्थामा को देखने का दावा किया था I डॉक्टर के अनुसार एक मरीज़ आया था, जिसे माथे पर कुष्ठ रोग की शिकायत थी I घाव पुराना होने के कारण उसका इलाज़ नामुमकिन-सा था लेकिन फिर भी उसे ठीक करने के लिए बहुत-सी औषधियों और जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया गया I जब डॉक्टर ने पाया कि घाव में कोई फायदा नहीं हो रहा है और आज भी घाव उतना-ही ताज़ा है जितना पहले दिन था, तो वह पूछ बैठा कि क्या तुम अश्वत्थामा हो? वह व्यक्ति ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा और डॉक्टर के दोबारा मुड़ते ही वहां से गायब हो गया I इस कहानी को सत्य घटना बताया जाता है I

अश्वत्थामा से जुड़ी दूसरी घटना की ओर रुख करें, तो सामने आती हैं कुछ सिद्ध योगियों की मान्यताएं I उनका कहना है कि आज भी एक आदिवासी समुदाय के साथ हिमालय की तलहटी में अश्वत्थामा का निवास है, जहाँ भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने वह रोज़ नियम से शिवलिंग पर फूल अर्पित करने आता है I इतना ही नहीं बल्कि वहां के लोगों का भी कहना है कि अपनी भूख-प्यास और क्रोध की अग्नि को शांत करने जब वह आता है तो साल में एक बार अवश्य दिखता है और फिर वापस जंगलों में भाग जाता है I

तीसरा सबूत यह है कि द्वापर युग के मनुष्यों की औसत ऊँचाई 12-14 फीट तक मानी जाती है, जो आज के युग में असंभव सा लगता है I वे मनुष्य एक बार में बहुत सारा भोजन ग्रहण कर लेते थे ताकि साल भर भूख ना लगे, हो सकता है अश्वत्थामा भी वर्ष में एक बार खाकर काम चला लेता हो I

कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि अश्वत्थामा जिंदा है तो दिखाई क्यों नहीं देता I तो इसका उत्तर भी हम आपको दे रहे हैं I असल में अश्वत्थामा को कुछ खास शक्तियां प्राप्त थीं, जिनसे वह सब लोगों के सामने ना आकर, कुछ ही को दिखाई देगा I

2 Comments
  1. अश्वत्थामा को अमरता का वरदान है। उतरा के गर्भ पर ब्रम्हास्त्र का प्रयोग किया इसलिए भगवान ने माथे से मणि निकलवा ली वह भी मणि वेद व्यासः जी के कहने पर मणि दी अश्वथामा ने तब भगवान बोले मणि का घाव कभी माही भरेगी कलयुग तक भटकते रहोगे भूखे प्यासे। श्राप की वजह से अमर नही है अश्वथामा। tv पर जो दिखाते है उसमें गलत दिखाते है। महाभारत ग्रंथ पढो उसमे सब सच लिखा है। अश्वथामा ने पांडवो के पुत्रों से युद्ध किया था रात में सोते हुए नही मार था।

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