आपके हाथ मैं पहना हुआ नग, की ताकत कुछ समय मैं खत्म हो जाती है


“एक्सपायरी डेट ” इस शब्द से सब नफरत करते है क्योंकि किसी चीज को खरीदना , थोड़ी आम बात हो गई है लेकिन वक्त दर वक्त उससे लगाव बढ़ना , वो आम नहीं है क्योंकि वो फिर दिल के काफी करीब होती है ।
अगर , हम नग नगों की एक्सपायरी डेट के बारें में बात करे तो ज्यादा गंदा लगता है क्योंकि पहले ही, वो महंगे मिलते है और फिर ये एक्सपायरी डेट की सिरदर्दी । लेकिन हां, नगों की भी एक्सपायरी डेट होती है कड़वा सच है मान लीजिए ।

क्योंकि कुछ लोगों का लगाव इतना बढ़ जाता है कि नग ,अंगूठी या पैडेंट को सालों साल पहनते है । चलिए बताते है आपको कैसे होती है नग की एक्सपायरी डेट , आपके हाथों से खरीदा हुआ हर माल दिन-प्रतिदिन घिसता जरुर है जिससे उसकी क्वालिटी और क्वांटिटी घटती जाती है । बस फिर उसके स्थान पर दुसरी चीज जगह ले लेती है । जिसे नवीनीकरण भी कहते है । वैसे ही , नगों की कहानी होती है उसे हर वक्त पहन कर घुमना, फिरना और फिर उसी के साथ सोना । वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो समझ आएगा कि प्रत्येक नग आपके शरीर के जरिए बाहरी
वातावरण से कुछ नकारात्मक ऊर्जा मिलती रहती है । नग की खासियत होती है कि वो पहले विशेष रश्मियों और तरंगों को इकट्ठा करती है
फिर आपके शरीर के स्नायु तंत्र के जरिए आपके शरीर को स्थिर बना देती है ।
आप ने ध्यान दिया हो तो पता लगा होगा कि नग धीरे धीरे टूटता है या कभी गिरने से भी दरारें आ जाती है फिर नग का रंग उतरने लगता है । माना जाता है कि नगों का इस्तेमाल रक्षा कवच के रुप में भी किया जाता है ।
इसके पीछे के कारण बताते है , पहला कारण तो ये है कि नग पर चढ़ा रंग असली नहीं बल्कि हीट ट्रीटमैंट से रंगा होता है ।
दुसरा कारण है कि अशुभ ग्रहों और नकारात्मक प्रभाव को अपने अंदर सजों लेता है । देखा जाता है कि सबसे ज्यादा आर्कषित करने वाली चीज भी अपनी महत्वता खो बैठती है ये तो सिर्फ नग है ।
नगों के परिक्षण :-
इसका परिक्षण करने का एक तरीका है , अपनी उगली में अंगूठी की आकृति को ध्यान से देखे , तो पाएंगे कि वह घिसी हुई मिलेगी ।
आपकी उंगली में गोल घुमाने पर घुमने भी लगेगी । क्योंकि उसकी शक्ति धीरे धीरे अपना अस्तित्व खो देती है ।
कितनी एक्सपायरी डेट होती है :-
जैसा कि आप जानते है कि हर चीज की एक्सपायरी डेट होती है तो मोती की उम्र अढाई साल होती है इसलिए जल्दी घिस भी जाती है लेकिन अमूमन, हम उसे जिंदगी भर तक घसीटने की कोशिश करते है । इसलिए मोती को अढ़ाई –तीन साल में बदल लेना चाहिए । वरना वो आपकी उंगली में सजावट के अलावा कुछ नहीं है
रत्नों के शास्त्र के मुताबिक , माणिक्य की उम्र 4 वर्ष होती है तो मूंगा की 3 वर्ष , पुखराज की 4 वर्ष होती है लेकिन हीरा की उम्र सबसे ज्यादा 7 साल होती है । मतलब अगर , आप हीरा खरीद ले तो 7 साल के लिए नए रत्न की जरुरत भूल जाए । वहीं नीलम सिर्फ 5 साल , गोमेद और लहसुनिया 3-3 साल के बाद बदलना पड़ेगा ।
नग के लिए बरतनी होगी एहतियात :-
हम ज्यादातर एक दुसरे की अंगूठी पहनने में संकोच नहीं करते है परंतु ऐसा होना नहीं चाहिए क्योंकि देखा गया है कि हम भाई बहनों माता-पिता और अपने सगे-संबंधियों से अंगूठी की अदला-बदली करते रहते है जो कि गलत है । आपकी पहनी हुई अंगूठी किसी की शुभता को अशुभता में बदल सकती है । इसलिए अगर आप प्रयोग नहीं कर रहे है तो उसे किसी नदीं में बहा दें ।
इसीलिए ही , अच्छे जौहरी पहनी अंगूठी को वापस लेने से इंकार कर देते है । अगर, किसी कारण वश आपको अंगूठी उतारनी पड़ जाए तो उसे प्रण लेकर दोबारा पहना जा सकता है लेकिन कभी भी खंडित नग नहीं पहनना चाहिए। इसकी बेहतर जानकारी के लिए रत्न विज्ञान के अलावा जन्म पत्रिका पढ़ने जानकार हो या फिर अच्छे ज्ञानी ज्योतिषी से परामर्श करे ।

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