Mahabharat के Dhritarashtra की अनसुनी कहानी , आखिर किस पाप की वजह से था अंधापन

  1. महाभारत की कहानी

आज  से 10 साल  पहले की बात  है जब हम  टी.वी  पर महाभारत  का कार्यक्रम  देखने के लिए  जुटते थे।  उसके बाद, हम  कई कहानियों के रोमांचक सफर पर चल पड़ते थे । कहा जाता है कि भारत में महाभारत काव्य राष्ट्रीय गाथा के रुप में माना जाता है । महाभारत की कहानियों  में प्यार , नफरत , लालच ,वरदान, युद्ध और रणनीति से भरपूर है ।

Dhritarashtra
Mahabharat के Dhritarashtra की अनसुनी कहानी
  1. पूर्वजन्म

आजकल लोग मानते है कि इस जन्म के कर्म का फल ,  आपको इसी जन्म में आगे  चलकर मिलेगा । लेकिन ऐसा नहीं है इसके लिए  महाभारत की कहानियों  पर ध्यान  दें , कि कैसे  द्रौपदी  को  पांच  पतियों की पत्नी  बनना पड़ा? । क्योंकि उसने पिछले जन्म में ऐसी  इच्छा  रखी थी ।  कैसे  कर्ण को  सूत पुत्र  कहलाना  पड़ा ? क्योंकि वो पूर्वजन्म में राक्षस था  । इन सब सवालों के उत्तर में पूर्वजन्मों के कृत्यों को कारण माना है ।

  1. पुत्र मोह

पिता -पुत्र  की कई  कहानियां पढ़ी और शायद लिखी गई है लेकिन पिता – पुत्र  के मोह के कारण दोबारा महाभारत जैसे  विकराल युद्ध की वजह बन जाए,  तो  क्या  होगा  ?     धृतराष्ट्र का  अपने पुत्रों मोह था  । क्योंकि धृतराष्ट्र ही ऐसा पात्र था  जो पुत्र  मोह में सब कुछ  बर्बाद कर देता है । यहां बता दें कि धृतराष्ट्र   जन्मांध थे

  1. धृतराष्ट्र की नेत्रहीनता

आज का विज्ञान  पूर्व जन्म को अहमियत नहीं देता  है । बता दें कि धृतराष्ट्र  की नेत्रहीनता का कारण पिछला जन्म है ।  महाभारत के पढ़ने  और समझने के नजरिए से देखा जाए तो धृतराष्ट्र  की नेत्रहीनता ही हस्तिनापुर और कौरवों के बीच युद्ध का कारण बनी । ।

  1. पूर्वजन्म

चलिए जानते है धृतराष्ट्र की अनकहीं कहानीयां  । जिनसे आप आज तक बेखबर है ।

  1. दुष्ट राजा

बड़े बुजुर्ग कहते है कि पिछले  जन्म में  धृतराष्ट्र एक क्रूर  राजा था  एक बार की बात  है कि वो सेवकों के साथ मिलकर नदी के पास से गुजर  रहा था  नदी में  हंस और उसके बच्चे खेल रहे थे  कि अकस्मात राजा की दुष्ट नजरों में हंस और उसके बच्चे  आ गए ।

  1. खूबसूरत हंस

जैसे ही राजा की  कुदृष्टि  हंस और उसके बच्चों पर पड़ी ।  दोनों के बुरे दिन शुरु  हो गए । तभी , राजा ने सेवको को आदेश  दिया कि  हंस  की आंखे  फोड़ दी जाए और  बच्चों का मार दें ।

  1. दृष्टिहीन

बस क्या था सेवकों ने  राजा की आज्ञा का पालन किया । हंस के बच्चों को मार दिया और हंस की आंख फोड़ दी । यही  से धृतराष्ट्र का  बुरा काल शुरु हो गया ।  क्योंकि अंतिम सासों में  हंस ने  राजा को श्राप दिया

हंस  ने  राजा को श्राप देते हुए कहा कि “जैसा  तूने मेरे साथ किया  है  वैसा ही तेरे  साथ भी होगा “ ।

  1. अपमान

हंस ने प्राण त्यागने से पहले राजा को कहा , कि जिन  नेत्रों  को तुमने मुझसे छीना है अगले जन्म में  इंही नेत्रों के लिए  अपमान झेलोगे , साथ ही अपनी संतानों की मौत पर कुछ कर भी नहीं पाओगे ।

  1. समस्त कुल का नाश

हंस के श्राप ने धृतराष्ट्र के आने वाले कल को अंधेंरे में धकेल दिया और जन्म से लेकर मौत तक अंधा रहने का श्राप दे दिया  । धृतराष्ट्र  को श्राप के कारण  अपनी संतानों की शक्ल तक देखने को नसीब नहीं हुई । इसी कारण के चलते  पूरा कुल का सर्वनाश भी हो गया ।

तो इस अनकहीं  कहानी से संदेश यह मिलता है  कि बुरा  करने से पहले बुरा सहने के लिए खुद को तैयार रखे ।

 

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