जानें मंत्रों के चमत्कार से कैसे बन सकता है जीवन खुशहाल

मंत्र ही हैं जीवन का आधार

कहते हैं कि ईश्वर ने सिर्फ इंसान बनाया, धर्म और जाति तो इंसान की ही रचना हैI आप चाहे मंदिर जाएं, मस्जिद जाएं, गुरुद्वारा या गिरजाघर जाएं… मानसिक शान्ति का अनुभव तो करते ही हैंI परमात्मा के रूप अनेक हो सकते हैं, चाहे हम उसे भगवान कहें, अल्लाह कहें, वाहेगुरु या गॉड कुछ भी कहकर पुकारें, परन्तु वास्तव में यह परम शक्ति एक ही हैI आपका धर्म चाहे कुछ भी हो, लेकिन आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि किसी भी धार्मिक स्थलों का वातावरण एक सुखद एहसास और आत्मिक शांति प्रदान करने वाला होता हैI धार्मिक स्थलों में मंत्र, उपदेश एवं श्लोकों का उच्चारण ही वहां के वातावरण को शुद्ध बनाए रखता हैI

धार्मिक एवं वैज्ञानिक दोनों ही मान्यताओं के अनुसार मंत्र और श्लोक मनुष्य को चमत्कारिक अनुभव कराने वाले होते हैं जोकि उसे आंतरिक रूप से मज़बूत बनाते हैंI इससे वह जीवन में आने वाली कोई भी समस्या या कठिनाई का बहुत आसानी से सामना कर सकते हैंI व्यक्ति की सहनशीलता और धीरज भी मंत्रों के उच्चारण से दिन-ब-दिन बढ़ती ही हैI

प्रयोगात्मक सोच वाले व्यक्ति के लिए अकसर मंत्रों के कोई मायने नहीं होते और उनके मन में यह सवाल रहता है कि मंत्रों का उच्चारण या जाप करना क्या वाकई ज़रूरी होता है? इसका उत्तर देते हुए हम आपको बताते हैं कि आपको गहराई से विचार करने की आवश्यकता है ताकि आप इन मंत्रों की ताकत व शक्ति को पहचान सकेंI परन्तु ध्यान रहे कि मंत्रोच्चारण सही होगा, तभी मनवांछित फल की प्राप्ति होगी I शास्त्र कहते हैं की मंत्रों की संख्या से अधिक उनकी शुद्धता का ध्यान रखना ज़रूरी होता हैI मंत्रों और शब्दों का सही व्यवहार, अवधि और गति की पूर्ण जानकारी होना अतिआवश्यक हैI




ऊं, वाहेगुरु, अल्लाह, और गॉड ऐसे चमत्कारी शब्द हैं, जो अलग-अलग धर्मों द्वारा माने जाते हैंI हिन्दू धर्म के “ऊं” शब्द को तो वैज्ञानिक भी ब्रह्मांड का सबसे चमत्कारी शब्द मानते हैंI यही कारण है कि हिन्दू धर्म में कोई भी मंत्र ऊं के बिना आरम्भ नहीं हो सकता ताकि मंत्र की ताकत को कई गुणा बढ़ाया जा सकेI ऊं की ध्वनि की गूँज पूरे ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैI हमारे वेदों और शास्त्रों ने दुनिया की सबसे पुराणी भाषा संस्कृत में यह मंत्र दिए हैंI मंत्रों के ऐतिहासिक वर्णन का उल्लेख करें तो मान्यताओं के अनुसार ये ऋषि-मुनियों के वैदिक मस्तिष्क से उत्पन्न माने जाते हैंI

कहते हैं वेद ना तो अविष्कृत हैं और ना ही लिखित हैं, परन्तु फिर भी ब्रह्माजी के हाथों में प्रकट हुए इन वेदों के मंत्र मनुष्यों के जीवन से आज भी जुड़े हैंI इन मंत्रों और ऊं का महत्त्व केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि अन्य धर्मों से भी गहरा सम्बन्ध रखते हैंI जिस प्रकार हिन्दू धर्म में ‘ऊं’ की अनोखी महिमा है, उसी प्रकार इस्लाम में अल्लाह, सिख धर्म में वाहे गुरु और गुरु ग्रन्थ साहेब एवं  इसाई धर्म में ‘गॉड’ शब्द का महत्त्व हैI यहाँ पर कहने का मूल अर्थ यह है कि शब्द चाहे जो भी हो परन्तु उसका सच्चे मन से और शुद्ध रूप से किया हुआ उच्चारण फलदायी सिद्ध अवश्य होता हैI

मंत्र-शक्ति के अद्भुत चमत्कार ना केवल शारीरिक बल्कि मानसिक अवस्था में भी बहुत-से सकारात्मक बदलाव लाते हैंI धार्मिक ग्रंथों के अतिरिक्त मनुष्य और विज्ञान भी मानते हैं कि यह मंत्र स्फूर्ति, रोग-प्रतिरोधक क्षमता, और चिंता से मुक्ति जैसे अनेक लाभ भी देता हैI यह बात भी साबित हो चुकी है कि मंत्रों के उच्चारण से हमारा तन, मन और इन्द्रियां बेहतर तरीके से काम करती हैंI केवल मान्यताएं ही नहीं बल्कि कई शोध भी यह पुष्टि करते हैं कि मंत्र हमें चिंता और रोग से मुक्ति दिलाने में सहायक होते हैंI कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार मंत्रोच्चारण को “योग-साधना” भी कहा जाता हैI इस योग साधना का असर ऐसा है जो उसकी ध्वनि से उत्पन्न तरंगों से वातावरण और अंगों के बीच सामंजस्य बिठा पूर्णता का एहसास देते हैंI

कई लोगों के अनुसार ऐसा भी माना जाता है कि गुरु-मंत्र अधिक फलदायी होता हैI गुरु-मंत्र का अर्थ है कि जिस गुरु का आप सबसे अधिक ध्यान और सम्मान करते हैं, उनके द्वारा प्रदान किया गया मंत्रI एक उत्तम गुरु का कर्तव्य होता है कि वह अपने शिष्य को गुरु मंत्र प्रदान करे, उसका सही उच्चारण और अर्थ भी समझाए, ऐसा करने से शिष्य के काम अवश्य बनते हैंI

मंत्रों का महत्त्व जानने के पश्चात आपको यह भी समझना होगा कि यह अपना प्रभाव समय के साथ ही दिखाते हैं, यह कोई जादू नहीं होता जो बोलते ही असर दिखा देI यदि हम शुद्ध उच्चारण और सही संख्या में पूरे धैर्य के साथ मंत्रोच्चारण करते हैं तो उसका चमत्कारिक प्रभाव ज़रूर देखने को मिलता हैI

हिन्दू संस्कृति के अनुसार ये मंत्र ही हमारे जीवन का वास्तविक आधार हैंI इसीलिए जीवन को सहज, सुखमय और खुशहाल बनाने के लिए इन मंत्रों का सही उच्चारण के साथ जप करना आवश्यक होता हैI

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