नवरात्री का आठवाँ दिन माँ महागौरी की पूजा अर्चना होती है

नवरात्री का आठवाँ दिन  माँ महागौरी की पूजा अर्चना होती है

माँ महागौरी – कहते हैं जब कालरात्रि को शांत करने के लिए भगवान शंकर ने उन पर गंगा जल छिड़का तब वे गौर वर्ण की हो गईं और उनका नाम महागौरी पड़ा | यही हैं जो गणेश जी की माता हैं | महागौरी सुख, शांति, वैभव, सौभाग्य, सुहाग का प्रतीक और अन्नपूर्णा हैं | इसीलिए अष्टमी के पूजन में कन्या-भोज आयोजित किया जाता है | ये अत्यंत शांत स्वभाव की हैं तथा इनका स्वरुप ब्राह्मण के लिए कल्याणकारी और बेहद उज्जवल है |

   देवी के गौर वर्ण की एक और कथा यह है कि जब महादेव को पति के रूप में पाने के लिए इन्होने कठोर तप किया तो उस समय देवी का शरीर मिट्टी से ढँक गया था | भगवान शंकर प्रसन्न हुए एवं माता को अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर स्वयं गंगाजल से धोया और तभी उनका प्रकाशमान शरीर गौर वर्ण का हो गया, अतः वे महागौरी नाम से जानी गईं |

   संगीत से लगाव रखने वाली इन देवी की पूजा में गायन शामिल अवश्य होना चाहिए | सच्चे मन से पूजा करने वाला और माँ के रूप में छोटी छोटी कन्याओं को भोजन करने वाला व्यक्ति सदा प्रसन्न रहता है | माँ ऐसे मनुष्य को जीवन की सभी बाधाओं से बचाते हुए सही मार्ग पे ले जाती हैं | माँ के व्रत के उपरान्त प्रसाद ग्रहण करते ही विचारों में शुद्धता आती है एवं सारे दुर्गुण और दुष्प्रभाव समाप्त हो जाते हैं |

   वैसे तो माँ के इस रूप में उनका वाहन वृषभ है परन्तु सिंह भी है | सिंह वाहन कैसे बना इसकी एक कथा हम आपको सुनते हैं | एक समय की बात है कि एक भूखा शेर भोजन की तलाश में भटक रहा होता है और तबी उसे तपस्या करती हुईं उमा देवी दिखती हैं | उनको देखते ही उसकी भूख का स्तर बढ़ जाता है लेकिन फिर भी वह माता की तपस्या से उठने के इंतज़ार में वहीं बैठ जाता है | जब देवी तपस्या से उठीं, उस समय तक भूख से वह शेर काफी कमजोर हो चुका था | उसकी हालत देख माँ को तरस आ गया और उन्होंने यह जान कि इसने भी मेरे साथ तपस्या की है इसीलिए उसे अपना वाहन बना लिया | इन दयामूर्ति का मंत्र है –




सर्वमंगलमंगल्ये , शिवे सर्वार्थसाधिके

शरण्ये त्र्यम्बिके गौरि नारायणि नमोस्तु ते ||

नवरात्री का नोवा दिन  माँ सिद्धिदात्री की  पूजा अर्चना होती है

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