नवरात्री के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना होती है

माँ ब्रह्मचारिणी – जैसा कि नाम से ही ज्ञात होता है कि ब्रह्मस्वरूप का ज्ञान कराने वाला और उसकी प्राप्ति कराने वाला है माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरुप | यह देवी धर्म, आध्यात्म और सात्विकता का प्रतीक हैं, इसीलिए इनकी पूजा से तप, त्याग, शुद्ध आचरण, साधना, वैराग्य (मोह-माया से मुक्ति), संयम आदि गुणों का विकास भी होता है| ब्रह्मचारिणी अपने सभी भक्तों के लोभ, अहंकार, आलस्य, असत्य, स्वार्थ और इर्ष्या जैसे समस्त गुणों को समाप्त कर देती हैं | इन देवी को सभी कलाओं और रीतियों का ज्ञाता माना जाता है और अपनी उपासना से प्रसन्न हो ये मनवांछित सभी कामनाएं पूर्ण देती हैं |

नवरात्रों के दूसरे दिन घर और मंदिरों में ब्रह्मचारिणी माता के नाम के जयकारे गूंजेंगे | ब्रह्म आचरण के कारण ये हमें और बुद्धि और विवेक प्रदान करती हैं और इसीलिए इनके भक्तों का कभी भी चारित्रिक पतन नहीं होता एवं इनका पथ भ्रष्ट भी नहीं होता | देवी का स्वरुप अचिन्त्य है, यह श्वेत वस्त्र धारण करती हैं एवं अष्टदल की माला और कमण्डल क्रमशः दाएं व बाएँ हाथ में धारण करती हैं | जब भगवान शंकर को अपने पति के रूप में पाने के लिए इन्होंने कड़ी तपस्या की तबसे इन्हें ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी के नाम से जाना जाता है | इनका तप बिल्कुल सरल नहीं था, क्योंकि माता ने 1000 वर्षों तक केवल फल खाए तो उसके अगले 3000 वर्ष तक पेड़ों से गिरी पत्तियां ही भोजन के रूप में स्वीकार की | माता आनंदमय जीवन बिताने में यकीन रखते हैं | इनकी उपासना का मंत्र है –

या देवी सर्वभूतेषु, सृष्टिरूपेण संस्थिता |

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः || 

नवरात्री का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा अर्चना होती है

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