विष्णु-पुराण द्वारा जानें बीमारियों के कारण



lord-vishnu-bless-garudaहमारे सनातन धर्म में ऐसे अनेक ग्रन्थ हैं, जिनके बारे में अधिकतर जनमानस अनभिज्ञ है।  हम सब ने अधिकतर गीता , रामायण , महाभारत आदि धर्म ग्रन्थों के बारे में ही सुना है । विष्णु-धर्मोत्तर पुराण ही एक ऐसा धार्मिक ग्रन्थ है, जिसका महत्व अद्वितीय है और जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं । असल में विष्णु-धर्मोत्तर पुराण, विष्णु-पुराण, का ही शेष संग्रह है, जिसमें ब्रह्माँड और खगोल-विद्या संम्बन्धी जानकारी के साथ-साथ युद्ध-व्यवहार कुशलता ,तप-साधना, रीति रिवाज , बीमारियाँ और उनके उपचार से भरा अतुलनीय ज्ञान भी है।

विष्णु-धर्मोत्तर पुराण/ विष्णु-पुराण के अनुसार धनवंतरी ने वाराणसी के राजा दिवोदास को समस्त ज्ञान सौंप दिया था ।धनवंतरी भगवान विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के जनक भी थे। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात राजा दिवोदास अपना समस्त राजपाट छोड़कर वन-वन भटकने लगे। इसी क्रम में उनके अनेक शिष्य बनते चले गए और उन्होंने अपना सारा ज्ञान योग्य शिष्यों को बाँट दिया। इस तरह उन्होंने इस पुराण में वर्णित  बीमारियाँ और उनके उपचार तथा आयुर्वेद के समस्त ज्ञान को जनमानस तक पहुँचाया । विश्वामित्र के पुत्र एवं आयुर्वेद के महान चिकित्सक सुश्रुत उन्हीं के  शिष्य थे।

आइए आपको विस्तार से विष्णु-धर्मोत्तर पुराण में कही गयी बातों के बारे में बताते हैं।

  • प्रकृति के विपरीत जीवन-शैली

भगवान धनवंतरी के कथनानुसार प्रकृति के विपरीत आचरण ही मानव जीवन के समस्त रोगों का कारण है।  अस्त-व्यस्त जीवनशैली और खानपान के तरीकों में अनुचित बदलाव ही रोगों की चपेट में आने का एकमात्र और सबसे बड़ा कारण है ।

  • मांसाहार

विष्णुधर्मोत्तर-पुराण के अनुसार, करीब 160 प्रकार की बीमारियाँ मांसाहार के कारण होती हैं। किसी भी पशु-पक्षी का मृत शरीर कीटाणुओं का घर होता है और जब कोई मांसाहार का सेवन करता है तो तो वह इन कीटाणुओं का शिकार होकर बीमारियों को आमंत्रित करता है।

  • पानी पीने की गलत आदत

अधिकतर हम में से बहुत से लोग खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लेते हैं। यह बुरी आदत 103 प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करती है, जिसमें कब्ज के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क से संबन्धित समस्याएँ भी शामिल हैं। हम सभी को खाना खाने के करीब 1 घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए, इससे भोजन को आराम से पचने का समय मिल जाता है|

  • चाय का अत्यधिक सेवन

विष्णुधर्मोत्तर-पुराण के अनुसार चाय का अत्यधिक सेवन शरीर में 80 प्रकार की बीमारियों का कारण बनता है । अतः जहाँ तक हो सके चाय का सेवन बिल्कुल ही बन्द कर दें अथवा केवल चाय की पत्तियों को ही पानी में उबाल कर , अल्प मात्रा में सेवन करें।

  • प्राकृतिक पदार्थों से बने बर्तनों का प्रयोग

आजकल काँच ,प्लास्टिक तथा मिक्स धातुओं के बर्तन ही प्रयोग में ज्यादा प्रचलित हैं। विष्णुधर्मोत्तर-पुराण के अनुसार  इन बर्तनों में भोजन ग्रहण करने से 48 बीमारियों हमारे शरीर में उत्पन्न होती  हैं। अतः जहाँ तक हो सके प्राकृतिक पदार्थ जैसे कि मिट्टी, लकड़ी तथा शुद्ध धातुओं जैसे ताँबा, काँसा आदि से बने बर्तनों का ही प्रयोग करें । इन्ही में खाना पकायें तथा इन्ही में खाना खायें भी।

  • मदिरा तथा अंडे का अनुचित सेवन

आजकल शराब तथा अंडे का सेवन एक फैशन सा बन गया है , जो कि स्वास्थ्य की दॄष्टि से अत्यन्त ही हानिकारक है। शराब का सेवन हमारे लीवर पर तथा अंडों का सेवन हमारी किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है।

  • भोजन के बाद स्नान

खाना खाने के बाद कभी  भी नहाना नहीं चाहिए । भोजन करने के बाद तुरंत स्नान करने से शरीर की पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है।  अतः जहाँ तक हो सके स्नान करने के बाद ही भोजन करें ।

प्राचीन समय से ही हमारे यहाँ स्नान करने के बाद ही खाने की परंपरा रही है , जिसका वैज्ञानिक आधार भी है।

  • नमक का प्रयोग

हर जगह सफेद नमक का प्रयोग आम बात है। विष्णुधर्मोत्तर-पुराण के अनुसार हमें खाने में सफेद नमक की जगह , सेंधा नमक का प्रयोग ही करना चाहिए । अगर सेंधा नमक ना उपलब्ध  हो तो काले नमक का प्रयोग करें ।

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