एक ही गोत्र में विवाह करने से बजती है खतरे की घंटी

हिन्दू संस्कृति के सभी मुख्य संस्कारों में से एक है विवाह संस्कार | यह दो आत्माओं के एक पवित्र बंधन में बंधने के बाद उनके जीवन के सफ़र की नई शुरुआत होती है | पर जब भी हिन्दू धर्म में विवाह तय किया जाता है तो उससे पहले बहुत सी बातों का ध्यान रखा जाता है | इन सारी बातों में से एक अहम पहलू है “गोत्र |” एक जैसे गोत्र हों तो लड़का और लड़की की शादो नहीं हो सकती | यह हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा बनाई गई एक परंपरा थी जिसे आज कहीं ना कहीं ब्लड ग्रुप के तौर पर वैज्ञानिक भी स्वीकार कर चुके हैं |

साधारणतः स्वयं का, माँ का एवं दादी का ये तीन गोत्र छोड़ कर शादी तय होती है परन्तु किसी-किसी स्थान की मान्यता के अनुसार नानी का गोत्र भी छोड़ दिया जाता है | गोत्र को ले कर सबके भिन्न भिन्न मत होते हैं, इसीलिए इन्हें टालने की संख्याएं भी भिन्न होती हैं|


यदि आपके मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि इन गोत्रों की रचना किस आधार पर हुई तो हम आपको बताते हैं | दरअसल, हमारे धर्म में आठ महान ऋषि थे जिनके नाम पर ही इन मूल गोत्रों की रचना हुई | इनके वंशजों के नाम पर आगे अन्य गोत्रों का निर्माण भी हुआ | उदाहरण के तौर पर कश्यप ऋषि के नाम पर कश्यप गोत्र बना तो भारद्वाज ऋषि के नाम पर भारद्वाज गोत्र उत्पन्न हुआ | सिर्फ हिन्दू धर्म नहीं बल्कि जैन धर्म में भी गोत्र माने जाते हैं | हालांकि, उनके यहाँ सात गोत्र होते है पर होते अवश्य हैं |

मनुसंहिता अर्थात मनुस्मृति जो हिन्दू धर्म में साक्षात ब्रह्मा की वाणी मानी जाती है, उसमें वर्णित है कि एक ही गोत्र में क्या नकारात्मक व दुष्प्रभाव हो सकते हैं | कहते हैं कि जो उपदेश स्वयंभुव मनु ने ऋषियों को दिए थे उन्ही का उल्लेख इसमें है | सगोत्र विवाह से बहुत से रोग, कमज़ोर संतान या संतान में दोष उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है |

इतना ही नहीं बल्कि मनुस्मृति की बातों को विज्ञान भी मानता है | विज्ञान के अनुसार मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि कई जन्मजात बीमारियों का कारक होता है सगोत्र विवाह |

ये तो हुई विज्ञान से सम्बंधित बात लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी शादी एक और कारण से भी सही नहीं रहती | जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि एक गोत्र में जन्मे लोग एक ही ऋषि की संतान होते हैं, अतः भाई-बहन बन जाते हैं | ये सगोत्र विवाह के वर्जित होने के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक है | समय आज बदल गया है, ज़माना बहुत आगे पहुँच गया है परन्तु फिर भी कुछ लोग मौजूद हैं जो आज भी इस परंपरा को चला रहे हैं |

वैसे मानना ना मानना तो सबके विचारों पर निर्भर करता है लेकिन मैं इतना अवश्य कहना चाहूंगी कि अगर आप एक गोत्र अथवा एक कुल में विवाह करने से बचेंगे तो बहुत सी समस्याओं से भी बच पाएंगे | पौराणिक काल से चली आ रहे हमारे पूर्वजों के इस नियम में कुछ तो सत्यता ज़रूर होगी | आगे आपकी मर्ज़ी |

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