जानिए शीतला अष्टमी व्रत क्या है , शीतला माता का स्वरुप कैसा है ?

जानिए शीतला अष्टमी व्रत क्या है , शीतला माता का स्वरुप कैसा है ?
सफलता पाने के लिए धैर्य के साथ सरलता का गुण होना अति आवश्यक है. सनातन धर्म में इन् गुणों की देवी माँ शीतला है . गधा इनका वाहन है, जिसे दूर्वा चढ़ाना लाभकारी माना जाता है .यह ९० दिन का व्रत होता है . इसे ही गौरी  शीतला व्रत कहा जाता है. इन महीनो में मौसम भयानक गर्म होता है . चेचक जैसी बीमारी होने की आशंका रहती है. इसमें ठन्डे भोजन से राहत मिलती है. प्रकृति के अनुसार शारीर निरोगी हो , इसलिए भी शीतला अष्टमी व्रत करना चाहिए. वैशाख कृष्ण अष्टमी व्रत ३० अप्रैल को है.
स्पष्ट है की शीतला माता स्वछता की अधिष्ठात्री देवी है. हाथ में झाड़ू होने का अर्थ है की माता के अनुसार हमे सफाई के प्रति जागरूक रहना चाहिए. कलश में भरे जल से तात्पर्य है की सवच्छ रहने से ही सेहत अच्छी रहती है . इस व्रत को करने से शीतला देवी प्रसन्न होती है और समस्त रोगों से छुटकारा दिलाती है . कड़ा धाम सिराथू कौशाम्बी , हरयाणा के गुरुग्राम और पोरबंदर में शीतला माँ के भव्य मंदिर है. वैशाख मॉस में माँ को जो के सत्तू , बसी ठन्डे मीठे जल से भोग लगाना चाहिए.

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