महापंडित रावण के जन्म से जुड़ा अनोखा रहस्य !


आपने और हमने राम , कृष्ण और शिव भगवान की जन्म कहानियां बहुत पढ़ी है लेकिन असुरों और विश्वेश्रवा- लंकाधिपति रावण की कहानी नहीं पढ़ी होगी , क्योंकि कौन नकारात्मक चीजों को पढ़ना पसंद करता है इसलिए आज हम आपको कुछ नया पढ़ने के लिए देते है ।
चलिए जानते है लंकाधिपति रावण की अनोखी कहानी ।

ये तक लोगों को नहीं पता कि रावण का कुल क्या था । चलिए , पहले आपको उनके पिता का नाम बताते है । महान ज्ञानी विश्वेश्रवा के पुत्र रावण थे । विश्वेश्रवा की तरह रावण भी बड़ा ज्ञानी था । इसलिए लंकाधिपति रावण को योगी के नाम से भी जाने जाते थे लेकिन यहां उनके जन्म के पीछे की कहानी पर ध्यान देते है ।

पहले , सालों साल असुरों और देवताओं के बीच युद्ध हुआ करता थी । ऐसे वक्त की बात है जब असुरों और देवताओं के बीच युद्ध चल रहा था तो भगवान विष्णु के क्रोध से बचने के लिए बलशाली असुर सुमाली माल्य्वान भाग निकला था । इसलिए असुर सुमाली विष्णु से बचने के लिए रसातल में जा छुपा ।

एक दिन की बात है जब सुमाली अपनी पुत्री कैकसी के साथ हिम्मत बांध कर , देवताओं की नज़रों से बचते हुए रसातल से बाहर निकला । जैसे ही, वह बाहर निकला । कुबेर देव की नज़रे सुमाली पर पड़ गई, बस उसे देखते ही सुमाली डर के मारे पीछे हट गया । फिर क्या था राक्षस सुमाली ने रसातल में वापसी कर ली। बता दें कि विश्वेश्रवा के पुत्र कुबेर देव है ।

जैसे , आज समाज में लड़कियों की जल्दी शादी करा दी जाती है वैसे ही, राक्षस सुमाली को अपनी पुत्री कैकसी की शादी की फ्रिक थी इसलिए उसने कैकसी से कहा कि मैं तुम्हारे लायक वर ढूढ़ने में असफल हुआ हूं अब तुम ज्ञानी ऋषि विश्वेश्रवा से भेंट करो और उनके सामने विवाह प्रस्ताव के बारे में बात करो ।

पुत्री ने पिता की सलाह का पालन किया और वो ऋषि विश्वेश्रवा के आश्रम पहुंच गई । ऋषि विश्वेश्रवा अपनी संध्या की वंदना में खोए हुए थे । जैसे ही ,उन्होंने आंखे खोली । कैकसी ऋषि विश्वेश्रवा के सामने खड़ी थी । ऋषि विश्वेश्रवा ने अपनी विद्या का इस्तेमाल करते हुए सुंदर कन्या की मनोस्थिति जान ली । और ऋषि विश्वेश्रवा ने कैकसी का विवाह – प्रस्ताव मान लिया ।

बताया जाता है कि जब कैकसी ऋषि विश्वेश्रवा के सामने आई थी उस वेला को दारुण वेला बोला जाता है इसका मतलब ये है कि अगर , ब्राह्मण कुल से कोई भी बच्चा जन्म लेगा , तो उसकी प्रवृति राक्षसों जैसी होगी । इस बात से ऋषि विश्वेश्रवा अनजान थे लेकिन कैकसी और सुमाली बेखबर नहीं थे ।

जैसे ही ,दोनों विवाहित हुए । ऋषि विश्वेश्रवा को पता चला कि उनका होने वाले पुत्र राक्षस के कुल से होगा । ऋषि विश्वेश्रवा ने कैकसी को बोला कि “हमारे होने वाले बच्चे राक्षस प्रवृति के होंगे । यह सुनते ही कैकसी अपने परमेश्वर के चरणों में आ गई । “
कैकसी बोली कि “ कैसे आपके पुत्र राक्षस प्रवृति के हो सकते है ? कैसे आपका तप और ज्ञान किसी वेला से बढ़कर हो सकता है ? आपके पुत्रों को आपके मार्गदर्शन की जरुरत है। इसीलिए उन्हें आपका आर्शीवाद दें ।“

बस फिर क्या था ऋषि विश्वेश्रवा का दिल पिघल गया और आर्शीवाद देते हुए बोले , अपना सबसे छोटे पुत्र में मेरे लक्षण होंगे यानि धर्मात्मा होगा । इसके अलावा कोई आर्शीवाद मेरे बस की बात नहीं है ।

9 महीने के बाद , कैकसी के पहला पुत्र हुआ । जिसके 10 सिर थे । ज्ञानी ऋषि विश्वेश्रवा के 10 सिर होने के कारण दसग्रीव नाम दिया । जिसे हम और आप रावण के नाम से जानते है । परंतु रावण जैसा ज्ञानी न कोई पैदा हुआ था न होगा , उन्होंने ने रावण संहिता मैं बहुत से उपाय बातये जिससे आप भी धनवान बन सकते है 

फिर कैकसी ने कुम्भकर्ण को जन्म दिया । उसके बाद ,एक पूत्री सूपर्णखा और अन्त में विभीषण हुआ । जिसे धर्मात्मा का वरदान मिला था तो ये कहानी थी रावण के जन्म की । थी ना दिलचस्प ।

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