नहाने का सही तरीका जानिए पुराणों के अनुसार

उबाऊ कर देने वाली  प्रक्रियाओं में से एक  है “नहाना ” जिसे करने  से सब कतराते है ,  नहाने चाहे बच्चा हो या जवान  । क्योंकि क्यों खुद को ठँड़े  पानी में गीला करना  ?

क्योंकि  ऐसे सवालों के सही उत्तर  तो मिलने से रहे।   क्या फर्क पड़ने वाला डॉयलॉग मार कर आगे बढ़ जाते  है ।  पर ये भूल जाते है कि आपका शरीर  नहाने के बाद कितना हल्का महसूस करता है इसके साथ ही शरीर कई प्रकार के रोगों से मुक्त हो जाता है । आपके चेहरे पर चमक ,  मन में प्रसन्नता और शरीर पर अजब सी रौनक आ जाती है ।  ये सब करने से आध्यात्मिक फायदें अलग है ।

नहाने का सही तरीका जानिए पुराणों के अनुसारलघुव्यास संहिता  के मुताबिक ,  किसी भी प्रकार का अच्छा कर्म नहाए बिना करने पर प्रभावहीन हो जाता है और वो कर्म देवताओं के स्थान पर राक्षस प्राप्त कर लेते है । (न हि स्नानं पुंसां प्राशस्त्यं कर्मसु तम्…लघुव्याससंहिता1/7)

अक्सर, हम श्मशान से लौटने के उपरांत स्नान करते है लेकिन हम और आप तेल लगाने के बाद स्नान नहीं करते है साथ ही महिला के साथ संग रात बिताने और दाढ़ी बनवाने के बाद नहीं नहाते है । जो कि चाणक्य की नीति के अनुसार सहीं नहीं है ।  चाणक्य नीति के मुताबिक , जब तक स्नान नहीं, आप शुद्ध नहीं ।  (तैलाभ्यंगे चिताधूमे मैथुने क्षौरकर्मणि…चाणक्य नीति 8/6)

महाभारत में देखा गया है कि पांडव और कौरव स्नान करते वक्त नदी की धार की तरफ मुंह करके नहाते थे । कभी आप जलाश्यों में नहाए तो सूर्य की तरफ चेहरा करके नहाए नहाना जरुरी है इससे आपको शुद्ध और  बेहतर महसूस होगा । (स्रवन्ती चेत् प्रतिस्रोते प्रत्यर्कं…महाभारत, आश्व 92)

गरुड़ पुराण में पढ़ा गया है कि अगर आप पवित्र जल प्राप्त करना चाहते है तो सरोवर और नदी के जल का इस्तेमाल करें ,क्योंकि कुएं के जल के मुकाबले झरने का पानी काफी पवित्र होता है । इसलिए गंगा के जल को  पवित्र नजरों से देखा जाता है । (भूमिष्ठादुद्धृतं पुण्यं तत:…गरुड़ पुराण, आचार, 205/113)

चरक संहिता में लिखा गया है कि किसी भी मनुष्य को शारीरिक थकावट को बॉय बॉय कहे, बिना स्नान नहीं  लेना चाहिए , साथ ही चेहरा धोए बिना स्नान करना तो बेमतलब है। (नावितक्लमो नानाप्लतवदनो…चरक संहिता सूत्र. 9/19)

नहाने का तरीका पुराणों के अनुसार
नहाने का सही तरीका जानिए पुराणों के अनुसार

लोग अपने पापों को नष्ट करने के लिए  कहां कहां  माथा नहीं  टेकते है  कभी  मंदिर , तो  कभी गंगा  । लेकिन इन पापों से  निपटने का  बड़ा आसान रास्ता है  । पद्यपुराण में लिखा है कि दोनों पक्षों की एकादशी के दिन स्नान पानी से नहीं बल्कि आंवले से करे  तो आपके सारे  पापों की आहुति चढ़ जाएगी । दूसरी तरफ आपकों विष्णुलोक सम्मानित करेगा वो अलग फायदा है । (एकादश्यां पक्षयुगे…पद्यपुराण, सृष्टि 13/10-11)

ज्यादातर लोगों की फितरत आलसी होती है जिसका सामना आए दिन हम करते है जैसे कि बर्तन मांझते ही अपने कपड़ों से हाथ पोछ लिए । या फिर नहाते  वक्त पुराने पहने कपड़ों से भीगा शरीर पोंछ लिया । इससे नहाने का क्या फायदा  ?  क्योंकि जिन कीटाणुओं को मारने के लिए आपने स्नान किया ,उनकों आपने दोबारा न्यौता दे दिया है । इससे बचने के लिए दोबारा नहाना होगा , इसलिए कभी भी पुराने कपड़ों से शरीर को ना पोंछे । (स्नानवस्नेण य:  कयद्दिेहस्य…वाधूलस्मृति 71)

मार्कंडेयपुराण का मानना है कि स्नान किए बिना ना तो पूजा करो ,ना ही माथे पर चंदन को लगाओं,  क्योंकि नहाए  बिना सारी  प्रक्रियाएं नाजायज लगती है । (नानुलेपनमादद्यान्नास्नात:…मार्कंडेयपुराण 34/43)

आम लोग सर्दियों में गर्म पानी का स्नान में प्रयोग करते है क्योंकि ठंड़े  पानी से नहाया नहीं जाता है । लेकिन कुछ दिन गर्म  पानी से दूरी बनानी चाहिए ।  क्योंकि शास्त्रो के मुताबिक, रविवार, श्राद्ध, संक्रांति, ग्रहण, महादान, तीर्थ, व्रत-उपवास, अमावस्या व षष्ठी तिथि  है जहां गर्म  पानी का इस्तेमाल  पाप करने के बराबर है ।  (रविसंक्रांतिवारेषु…ब-हत्पराशर स्मृति 2/112)

भारत में कई  जगह ऐसी है जहां लोगों को नंगा होकर नहाने में अलग मजा आता है  लेकिन महाभारत के अनुसार , नंगा होकर नहाना पाप करने के बराबर है इसलिए नंगा बदन होकर ना नहाए ।

(न नग्न: स्नातुमर्हति…महाभारत, अनु, 104/67)




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