भगवान् बुद्ध ने बताया ज़िन्दगी मैं अच्छी पत्नी का महत्व


बदलते मोड़ों पर धर्म एक मार्गदर्शन का काम कर रहा है क्योंकि ना तो लोगों को खुद का अता-पता है । बस खुद ही खुद में लगे हुए है भागे जा रहे है । परंतु धर्म को मानने और समझने वाले लोग भी कभी कभी धर्म संकट में फंस जाते है फिर उन सवालों के उत्तरों को ढूढ़ने में जिंदगी खर्च कर देते है ऐसे ही एक सवाल से हम आपको आज रुबरु करा रहे है ।
गौतम बुद्ध ने प्रत्येक व्यक्ति को 4 शादी करने की नसीहत क्यों दी ?

यह सवाल आपके जेहन में आते ही आपको विचलित जरुर कर देता होगा ,क्योंकि जिसने दुनिया की सारी खुशियां , राजाओं की आराम पंसद जिंदगी छोड़ जंगलों में सिधार गए और तो और खुद को नए सांचे तब्दील किया । वो ऐसा क्यों बोल रहे है । जो कि अपने आप में एक बड़ा सवाल है जिसकी तह तक जाना महत्वपूर्ण और समझना भी जरुरी है ।
गौतम बुद्ध की हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म तक की यात्रा कोई आसान नहीं थी लेकिन सवाल पर वापस रुख करते है । सवाल से पर्दा उठाते हुए बताते है कि ये एक सच्ची घटना के आधार पर भगवान बुद्ध ने बोला था कि मनुष्य को एक शादी नहीं बल्कि 4 शादी करनी चाहिए । इसके पीछे उनके पास एक कहानी थी जो कि खुद में एक रोचक और दिल छूने वाली है ।

गौतम बुद्ध द्वारा सुनाई गई एक कहानी :-
आगम सूत्र के मुताबिक , कहानी कुछ ऐसी है कि एक शादी-शुदा आदमी था जिसकी 4 बीवियां थी।
हम उस दौर की बात कर रहे है जहां 4 बीवियां रखना गुनाह नहीं था लेकिन थोड़े वक्त के बाद उसकी तबीयत नासाज़ रहने लगी थी साम–दाम-दंड करने के बावजूद उसकी बीमारी ठीक होने का नाम नहीं ले रही थी बल्कि दिन-प्रतिदिन हालत बद से बदतर होती जा रही थी । उसे महसूस होने लगा थी कि अब कोई रास्ता नहीं बचा है बस मौत को गले लगाना पड़ेगा। वह बीमारी से लड़ते लड़ते अकेले पड़ने लगा था और उसके चेहरे पर उदासी ने अपना घर सा बना लिया था । एक दिन उसने एक निर्णय लिया और जानने की कोशिश की , कौनसी पत्नी उसके साथ जाने को राजी होगी । तो इसकी पड़ताल उसने अपनी पहली बीवी से शुरु की ।
पहली पत्नी से प्रश्न :-
पति बोला :- पत्नी, मेरा वक्त कब खत्म हो जाए, मैं खुद इससे बेखबर हूं लेकिन तुमसे मैंने बेइंतहा प्रेम किया है और मरने के बाद भी तुमसे उतना ही प्यार बरकरार रखना चाहता हूं । तुम्हारे साथ आगे का सफ़र बिताना चाहता हूं ।

क्या तुम इस सफर में मेरा हाथ पकड़े रखोगी ?
क्या मेरे कदमों से कदमों मिलाकर आगे बढ़ोगी ?
जैसे ही, पति ने पत्नी से सवाल किया , कमरे में सन्नाटा छा गया । उस सन्नाटे में पत्नी भी सन्न रह गयी, क्योंकि वो खुद इस पति-पत्नी के रिश्ते में उलझ गई थी । लेकिन हिम्मत जुटाते हुए बोली
पत्नी बोली :- स्वामी , आपकी शादी मुझसे हुई ,आपने मुझसे शिद्दत के साथ मोहब्बत की है लेकिन (यहां पति की धड़कनें थोड़ी थमी ) आपकी मौत के साथ मेरा और आपका रास्ता अलग अलग होता है । आगे का रास्ता हम एक-दुसरे के साथ व्यतित नहीं कर सकते है । बस ये कहते ही, उसी क्षण पत्नी ने पत्ति को छोड़कर आपने रास्ते पर निकल पड़ी ।
उदास पत्ति समझ नहीं पा रहा था कि ऐसे कैसे मेरी पहली पत्नी मुझे छोड़कर चली गई । लेकिन उसने हार नहीं मानी और आगे कदम बढ़ाते हुए दुसरी पत्नी की ओर चल पड़ा।
दुसरी पत्नी से प्रश्न :-
पत्ति ने विन्रम तरीके से पत्नी से पूछा:- क्या मेरे मरने के बाद भी तुम मेरा हाथ थामे रहोगी ?
पत्नी ने जबाव देते हुए कहा कि जब आपकी पहली पत्नी ने हाथ थामने से इंकार कर दिया तो आपको मुझसे भी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए । दोबारा भी हाथ खाली ही रहे और वो भी, उत्तर देते ही घर छोड़ कर अपने रास्ते चली गई ।
पत्ति की उदासी का स्तर बढ़ता जा रहा था क्योंकि पहले ही , उसकी दो बीवियों ने उसके साथ देने से मनाही दे दी थी। बस क्या था एक तरफ निराशा बढ़ती जा रही थी दुसरी तरफ, तीसरी बीवी की प्रतिक्रिया का इंतेजार था ।
तीसरी पत्नी से प्रश्न
पत्ति ने तीसरी पत्नी से पूछा :- समान सवाल का एकदम समान उत्तर हाथ लगा । और दोबारा भी खाली हाथ मलने पड़े ।
अब कोई आशा ना रही थी ना ही कोई उम्मीद , बस सिर्फ चौथी बीवी खानापूर्ति के लिए बची थी । पत्ति के पास उत्तर पहले ही था लेकिन वो फिर भी पूछने की औपचारिकता पूरी करना चाहता था।
चौथी पत्नी से प्रश्न :-
उसने चौथी पत्नी से पूछा :- सवाल पूछने से पहले निराशा सिर उठा रही थी और पूछने से रोकने की कोशिश कर रही थी आखिरकार उसने सवाल पूछ ही लिया,
हिचकिचाहट भरी आवाज में पूछा कि क्या मेरे मरने के बाद मैं जिस दुनिया में जाउगा, वहां तुम मेरा साथ चलना चाहोगी ?
अपेक्षाओं का बादल काफी कम हो गए थे कोई साहिल मिलने की गुजांइश भी नहीं थी ।
पत्नी ने प्रतिक्रिया दी :- परमेश्वर, मैं आपके साथ ही चलूंगी , जहां भी आप अपने साथ मुझे ले जाना चाहे । मैं आंख बंद करके आपके हाथों में हाथ पकड़े चलूंगी ।
इस कहानी के खत्म होते ही, गौतम बुद्ध ने कहा कि हर आदमी और औरत को 4 बार शादी करनी चाहिए , जिससे आप चौथी बीवी से वो सुन सके जो आप सुनने की चाहत रखते है । लेकिन इस वक्तव्य के पीछे गौतम बुद्ध की मंशा कुछ और ही थी चालिए ।
ये भी बताते है कि क्या विचार थे इस वक्तव्य के पीछे ?
मृत्यु का क्या रहस्य ?
गौतम बुद्ध मानना है कि कहानी में पहली पत्नी हमारे” शरीर” की तरह पेश आती है। क्योंकि वो मृत शरीर की तरह पेश आती है जिसको आपको त्यागना ही पड़ता है । इससे साफ पता चलता है कि पहली पत्नी शरीर की तरह होती है जिसका साथ सांसों के साथ तक होता है उसके बाद शरीर जलने के लिए बचता है ।
दुसरी बीवी , आपके “भाग्य” की तरह होती है लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि मौत के बाद भाग्य का क्या काम ? मौत के बाद ही तो पता चलता है कि हमारे कर्मो के हिसाब से हमें क्या मिलने वाला है और क्या नहीं । लेकिन जो भी मिलता है वो एक बिस्मिल्लाह की तरह होता है इसलिए बोला जाता है कि कभी भाग्य किसी के साथ हमेशा नहीं रहता है।

इस कहानी में तीसरी बीवी से अभिप्राय है “रिश्ता” । आपको महाभारत में वो एपिसोड जरुर याद होगा, जहां
अर्जुन अपने पूत्र अभिमन्यु की मृत्यु के बाद गम़ में डूब गया था और अर्जुन ने युद्ध के बीच में ही हथियार डाल दिए थे । उसके बाद , श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि इंसान मौत के बाद उसका साथ तो आत्मा भी नहीं देती है तो ये तो तुम्हारा पूत्र है। उसी वक्त उदाहरण दिया , कृष्ण ने अभिमन्यु को उसके सामने खड़ा कर दिया । भावनाओं में डूबे अर्जुन ने अपने पूत्र को गले लगा लिया, लेकिन अभिमन्यु ने उसे धक्का दे दिया ,और सवाल किया कि “ आप कौन हो”? तो समझ में आया कि कृष्ण सही बोल रहे है ।

तो गौतम बुद्ध अतिंम बीवी के मतलब के बारे बताने लगे , जो अपने पत्ति के साथ जाने को तैयार हो गई थी
गौतम बुद्ध ने बताया कि चौथी पत्नी है हमारे किए गए “कर्मो” की तरह होती है जैसा कर्म हम करते है वैसा ही परिणाम हाथ लगता है । क्योंकि यही है जो आपको आने वाले कल तक आपका पीछा नहीं छोड़ती है इसका लेखा-जोखा आने वाले पलों तक आपके खाते में होता है । जैसा कि आपके बुर्जुग कहते आए है “
सब कुछ कर्मों पर निर्भर करता है कि हमारी आत्मा नरक जाने वाली है या स्वर्ग “।

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