विष्णु भगवान ने आख़िर क्यों अयोध्या में ही लिया अवतार, पढ़िए पूरी कहानी

 

सृष्टि के पालनहार को विष्णु भगवान के नाम से भी जाना जाता है लेकिन बहुत ही कम है जो ये जान पाते है कि क्यों भगवान विष्णु ने अपने अवतार के लिए अयोध्या को चुना ?

अगर आप बेखबर है तो आइए बताते है क्या कारण है –

मनु और शतरूपा से ही मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई

बचपन में एक सवाल पूछा जाता था कि इंसान की उत्पत्ति कहां से होती है या फिर पहले कौन आया अण्डा या फिर मुर्गी। तो ऐसे सवालों से आप भी जूझे होंगे । तो चलो बताते है कि मनुष्य की उत्पत्ति मनु और शतरुपा से हुई है यहां बता दें कि ये दोनों धर्म पति- पत्नी थे ।

मनु को विष्णु भगवान की भक्ति न कर पाने का था दुख

मनु ने राजाओं की तरह राज तो किया ,लेकिन जिंदगी भर एक गम सताता रहा कि वो श्रीहरि से दुर रहे । उनकी भक्ति में कोई योगदान नहीं दे सके । इसलिए ज़ीस्त के अंतिम दिनों में वो अपने पुत्र को सत्ता की कुंजी थमा कर ,अपनी पत्नी के साथ वन में वास करने चले गए । जहां उन्होंने अपनी अंतिम सांसों को भगवान विष्णु के नाम कर दिया ।

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भगवान विष्णु ने मनु और शतरुपा की मनोकामना पूरी की

विष्णु भगवान को ख़ुश करने के लिए की तपस्या

कोई जल के सहारे कैसे अपनी जिंदगी गुजार सकता है, इसका उचित उदाहरण है मनु और शतरुपा । जिन्होंने भगवान विष्णु को खुश करने के लिए जी-जान से तपस्या की।

साथ ही, सात साल तक सिर्फ और सिर्फ जल पर निर्भर रहे । बता दें कि उन्होंने तीर्थ श्रेष्ठ नैमिषारण्य धाम पहुंचकर तपस्या की थी ।

वरदान में मांगा भगवान विष्णु जैसा पुत्र

बस क्या था भगवान विष्णु की कृपा हुई । और भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि अगले जन्म में मनु के पुत्र के रुप में जन्म लेंगे । क्योंकि मनु और शतरुपा को विष्णु जैसे पुत्र की कामना थी इसलिए भगवान विष्णु ने मनु की बात पर सहमति जताई ।

विष्णु भगवान ने कहा कि वो खुद उनके पुत्र बनकर जन्म लेंगे

भगवान विष्णु ने पत्नी-पति से कहा कि जब मनु अयोध्या के राजा दशरथ के रुप में जन्म लेंगे । तब वो उनके पुत्र बनकर पैदा होंगे ।

अपने दिए वरदान के कारण ही भगवान विष्णु ने अयोध्या में अवतार लिया

इसीलिए भगवान विष्णु ने मनु और शतरुपा की मनोकामना पूरी की , और वो भगवान राम के रुप में मनु परिवार में जन्म लिया ।

जय श्री राम …..

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