भगवन श्री कृष्ण ने दिखाया अर्जुन को किस्मत का चमत्कार


कहते है कहानियां कही भी , कभी भी बन जाती है । ऐसी कहानियों में से एक मशहूर कहानी है लेकिन इस कहानी में आपको “किस्मत” का खेल और भगवान श्री कृष्ण की लीला का कमाल पढ़ने को मिलेगा । कहानी है “भगवान श्री कृष्ण ”और ”अर्जुन ”की ।
बात तब की है , श्री कृष्ण और अर्जुन सैर के बाद हस्तिनापुर लौट रहे थे । इस दौरान दोनों बातचीत करते जा रहे थे कि अर्जुन की निगाहें गरीब ब्राह्मण पर पड़ी । दयनीय हालत में ब्राह्मण को देखकर अर्जुन की आत्मा पसीजने लगी और एक सोने से भरी थैली देने में हिचक तक नहीं की । सोना देखकर ब्राह्मण का दिल खुश हो गया , बस अब क्या था ब्राह्मण के दिन फिरने वाले ही थे कि किस्मत की लकीरों में से एक बदनसीब लकीर खीच गई । चालिए बताते है कैसे । ब्राह्मण जंगल से गुजर कर घर की तरफ जा रहा था तो रास्ते में लुटेरे ने ब्राह्मण को लूट लिया । ब्राह्मण की जिंदगी पल भर में आसमान से नरक में जा बसीं थी क्योंकि उसे दोबारा से भूखा रहना पड़ा और अंतत भिक्षा मांगने को मजबूर होना पड़ा ।
दोबारा ऐसे ही ,भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन उसी रास्ते से गुजर रहे थे उस बदहाल ब्राह्मण को दोबारा देख लिया । जैसे ही ,अर्जुन की नजरें पड़ी तो उत्सुकता वश पूछ लिया कि
“ऐ ब्राह्मण तुम्हे एक सोने से भरी थैली दी थी “ फिर भिक्षा क्यों मांग रहे हो ।
ब्राह्मण बोला :- सरकार आपने जो थैली दी थी वो मुझसे एक लूटेरे ने लूट ली ,इस कारण वश भूख की मजबूरी के चलते मुझे भीख मांगने पर विवश होना पड़ा ।
बस फिर क्या था अर्जुन ने अपने महान अर्जुन होने का सबूत देते हुए एक मुल्यवान हीरा दिया । इसे देखकर ब्राह्मण ने अर्जुन का दिल से शुक्रिया अदा किया । इस बार चालकी से ब्राह्मण ने सुरक्षित रास्ते से घर पहुंचा , लेकिन वो यह भूल गया था कि वो अपनी किस्मत की लकीरों को बदल नहीं सकता है । देखते है आगे क्या होता है ।
ब्राह्मण को लूटने का भय इतना था कि उसने हीरे को घड़े में धिपा दिया । क्योंकि घड़े का कोई इस्तेमाल नहीं कर रहा था लेकिन यहीं ब्राह्मण मात खा गया । हुआ ये कि ब्राह्मण की नींद आ गई इसी बीच में उसकी पत्नी पानी भरने के लिए उसी घड़े को लेकर चली गई । क्योंकि जिस घड़े में उसकी पत्नी पानी लाया करती थी वो उसी दिन टूट गया था । किस्मत से कौन भाग सकता है यह उसका प्रमाण है । मतलब ये है कि “समय और किस्मत से पहले कुछ नहीं मिलता ” ।
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जैसे ही ब्राह्मण की पत्नी पानी भरने नदी पहुंची तो वहां हीरा पानी में बह गया । जैसे ही , ब्राह्मण की आंख खुली तो भरे घड़े को देखकर समझ गया , कि कुछ ना कुछ बुरा हो गया है । इसलिए दोबारा से उसी रास्ते पर लौट गया, जहां से उसने भिक्षा मांगना शुरु किया था । फिर से वो ही हादसा हुआ । दोबारा से , कृष्ण और अर्जुन ने ब्राह्मण को उसी बदहाल भेष-भूषा में देखा । अर्जुन आश्चर्यचकित रह गया, उसने पूछा कि अब क्या हो गया , फिर उसने पूरी व्यथा सुनाई ।

तब क्या था भगवान श्री कृष्ण अर्जनु की तरफ देखा और मंद मंद मुस्कुराने लगे । श्री कृष्ण ने ब्राह्मण की सहायता के कदम आगे बढ़ाया और दो पैसे दान में दिए ।

अर्जुन उत्सुकता में आकर कृष्ण से बोले कि” मैने सोने की थैली और मुल्यवान हीरा दिया उसके बावजूद ब्राह्मण की जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया । तो आपके दो पैसों से कैसे ब्राह्मण की जिंदगी में तब्दीली आएगी ”।
कृष्ण ने अर्जुन की ओर इशारा करके उसके पीछे चलने को बोला । बस दोनों ब्राह्मण को पीछे पीछे चल पड़े । लेकिन ब्राह्मण के दिमाग में उलझनों की उबाल खड़ा हो गया था क्योंकि वो ये समझ नहीं पा रहा था कि इन दो पैसो से दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होगी । बस अचानक से ब्राह्मण की नज़र मछुआरे पर पड़ी , वहां उसके जाल में एक मछली बुरी तरह तड़प रही थी उसकी तड़प को देखकर वो खुद को ज्यादा देर तक रोक नहीं सका और मछुआरे के पास जाकर उन दो पैसो से तड़पती मछली खरीद ली । बस क्या था कमंडल में डालकर उस मछली को नदी में बहाने के लिए चल पड़ा । जैसे ही , उसने मछली को बहाने लगा , उसे एक चमकती हुई चीज उसके मुंह में दिखाई दी । बस, ब्राह्मण समझ गया कि खोई हुई चीज वापस मिल गई है क्योंकि वो चमकीला पदार्थ हीरा था इसी खुशी में ब्राह्मण ने आपा खो दिया और जोर जोर में चिल्लाने लगा ।
“मिल गया “
“ मिल गया “
वक्त ऐसा था कि उस वक्त वो लूटेरा भी उसी नदी के पास से गुजर रहा था जिसने ब्राह्मण से सोने की थैली लूटी थी तो लूटेरे ने डर के मारे ब्राह्मण का उसका सारा धन लौटा दिया और उसके पैरों में गिरके क्षमा याचना मांगने लगा ।
बस , ये देखकर अर्जुन समझ गया कि ये सारा खेल भगवान श्री कृष्ण का रचाया हुआ है ।
बस फिर क्या था अर्जुन हाथ को जोड़ते हुए बोले , ऐसा आपने क्यों किया । श्री कृष्ण बोले कि यह कोई चमत्कार नहीं था ये सारा किस्मत का खेल था । जैसे ही , ब्राह्मण को मुल्यवान हीरा और सोना दिया वो खुद की खुशी , खुद की जिंदगी के बारे में सोचने लगा और सबको भूल गया , लेकिन जब उसे दो पैसे दिए तो उसने दूसरों के दर्द के बारे में सोचा । इसका मतलब , सिर्फ इतना हैकि जो व्यक्ति दूसरे के बारे में सोचता है वो हमेशा खुश रहता है और उसका भला होता है । “कर भला तो हो भला “ ।

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